राब्ता
💕 💕 💕
चाहा था तुझे शिद्दत से ,
मुन्तज़िर था मेहजबीन के |
तू मिली थी इनायत से ,
हूँ फ़ना इस नज़ाकत पे ||
बहिश्त के दस्तक पे ,
मुड़कर देखेगी तू मुझे |
सदा रहोगे मेरे हाफ़िज़ा में ||
कामना है क़ुरबत इस अंजुम से ,
क्या यही हे खामयाज़ा ख़ुदा के ?
💔
💕 💕 💕
चाहा था तुझे शिद्दत से ,
मुन्तज़िर था मेहजबीन के |
तू मिली थी इनायत से ,
हूँ फ़ना इस नज़ाकत पे ||
बहिश्त के दस्तक पे ,
मुड़कर देखेगी तू मुझे |
सदा रहोगे मेरे हाफ़िज़ा में ||
कामना है क़ुरबत इस अंजुम से ,
क्या यही हे खामयाज़ा ख़ुदा के ?
💔
So beautiful!
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