महरम

💓    💓     💗     💓    💓

ज़िन्दगी के आफ़ाक़ पर खड़े ,

परिवार के दस्तूर में लिपटे |

मिलेगी एक तबस्सुम मुझे ,

निकालेगी हमें असीरी से ||

मात देगी मेरी आना ,

बनेगी मेरी वो मसीहा |

मोहब्बत के महरूम ना बना ,

तिश्ना है तो बस हमदम का ||

मेरे तख़य्युल की हूर ,

अब बनो मेरी नूर |

फ़तेह करना हे ये बयाबीन ,

उज़्र ना दो मेरे ज़ोहरा जबीन  ||

इस इश्क़ की इब्तिदा

को इंतज़ार हे , पिहरवा 

जज़्बा हे तुझे पाने का ,

अब तो बनो मेरी सावरिया ||

💓    💓     💗     💓    💓



Comments

  1. The art of writing is so gracefully addressed here! This is so good!

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  2. Viznu19:28

    ����
    Loved it��

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